मधुराद्वैत – ये केवल नाम नहीं, एक भाव है, एक सन्देश है! हमारे संतो की मान्यता तो यही है जहां मन वृन्दावन बन जाये वहा मीरा जी की माधुर्य भक्ति और आदिशंकराचार्य जी का अद्वैत ज्ञान ये दोनों प्रायः अपने आप प्रकट हो जाते है! आइये इसीका अनुभव करते है इस भजन संग्रह में-

  1. मन चल रे वृन्दावन धाम : वृंदा माने शीतलता, शांति और प्रसन्नता ! जब मन में भक्ति का जन्म हो जाता है, वो मन अपने आप वृन्दावन बन जाता है! यह भजन हमें भक्तिरस की और ले जाता है !
  2.  मैं तो तेरी हो गयी शाम : ये अगला भजन समर्पण का प्रत्यक्ष उदाहरण है ! कृष्ण कहते है “सर्व धर्मान परित्यज्य मामेकं शरणम् व्रज! ” समर्पण ही सार्थकता है !
  3. कौन बतावे बाट गुरुबिन : जीवन की विकृतियों में भी सद्गुरु हमें अपने लक्ष्य तक पहुचाते है! कबीरजी का यह काव्य हमें सद्गुरु के प्रति कृतज्ञ होने के लिए प्रेरित करता है !
  4. मेहेरबा आ गया है : कृष्ण माने जो हर काम कुशलता से करे! कृपा से ही कुशलता का विकास होता है, इसी निरंतर कृपा के प्रति सजग करता है यह भजन !
  5. कान्हा ने मनाओ कोई (उद्धव गीत) : उद्धव कृष्ण के एक ऐसे ज्ञानी भक्त है, जिन्हें कृष्ण अपना सन्देश लेकर वृन्दावन भेजते है ! इस भजन में उद्धव और गोपियों का संवाद एवं गोपियों की कृष्ण-दर्शन की तड़प दर्शायी गयी है !
  6. म्हारी चुनड़ी बसन्ती (चुनड़ी गीत) : चुनरी स्त्री की सुन्दरता बढाती है! भाव और भक्ति की चुनरी से जीवन की सुन्दरता बढ़ती है ! गोपियों की यह निश्चल भक्ति और प्रेम भाव को देखकर उद्धव ने भी भक्ति की चुनरी ओढ़ कर खुद गोपि बन गए!
  7. हरी नारायणा (नाम धुन) : जिसके नाम मात्र से पाप, दुःख और क्लेश का हरण हो जाता है वही तो ‘हरी’ है! जगत का अंतिम सार है उसका नाम ! इसीलिए कृष्ण कहते है “नाहं वसामि वैकुंठे योगिनाम हृदये न च ! मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्टामी नारद !

About Album:
Madhuradvaith is not just a name of a music album, it is a state of being. The ancient Rishis and Seers of India have said that a mind that is like Brindavan will house both the Bhakti or Devotion of Meeraji and Gyan or Knowledge of Adi Shankaracharyaji. This bhajan album by VaibhaviShriji Alekar gives the listener an unforgettable experience and is an expression of that state of consciousness.

Songs Title:

1. Man Chal Re Vrindavan Dhaam

2. Main Toh Teri Ho Gayi Shaam

3. Kaun Batawe Baat Guru Bin

4. Meherbaa Aa Gaya Hai Meherbaani Lutane

5. Kanha Ne Manaao Koi (Uddhav Geet)

6. Mhari Chunadi Basanti (Chunari Geet)

7. Hari Narayana (Naam Dhun)

Listen / Purchase Online :

About the Author Devi Vaibhavishriji

Devi VaibhaviShriji teaches Art of Living courses & addresses audiences all across the Maharashtra state throughout the year. Deviji has delivered spiritual discourses on Shrimad Bhagwat Katha, Srimad Devi Bhagavatam, Shri Ram Charit Manas, Bhagavad Gita and Shiv Maha Puran in almost all cities of Maharashtra Specially in Marathi & Hindi languages, with a unique way by relating it to an ordinary man’s day-to-day life. Thousands of lives have been experienced peace, harmony and joy through the knowledge of Her oratory skills and sweet singing voice.

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