Types of karma


प्रारब्ध कर्म तथा संचित कर्म

कुछ कर्म बदले जा सकते हैं और कुछ नहीं ।

जैसे हलवा बनाते समय चीनी या घी की मात्रा कम हो, पानी अधिक या कम हो, उसे ठीक किया जा सकता है । पर हलवा पक जाने पर उसे फिर से सूजी में नहीं बदला जा सकता ।

मट्ठा अधिक खट्टा हो, उसमें दूध अथवा नमक मिलाकर पीने लायक बनाया जा सकता है । पर वापस दूध में नहीं बदला जा सकता ।

प्रारब्ध कर्मों को नहीं बदला जा सकता । संचित कर्मों को आध्यात्मिक अभ्यासों के द्वारा बदला जा सकता है । सत्संग के प्रभाव से सभी बुरे कर्मों के बीज अंकुरित होने के पहले ही नष्ट हो जाते हैं ।

जब तुम किसी की प्रशंसा करते हो, तुम्हें उसके अच्छे कर्मों का फल मिल जाता है ।

जब तुम किसी की बुराई करते हो, उसके बुरे कर्मफलों के भागीदार बनते हो ।

इसे जानो, और अपने अच्छे और बुरे, दोनों ही कर्मों को ईश्वर को समर्पित कर, स्वयं मुक्त हो जाओ ।

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