भगवान श्री दत्तात्रेय


दत्तात्रेय की भीतर ये तीनों शक्तियां विद्यमान थीं, इसका अर्थ ये हुआ कि वे गुरु शक्ति के प्रतीक थे। मार्गदर्शक, सृजनात्मकता, पालनकर्ता एवं परिवर्तनकर्ता सभी शक्तियां एक साथ! दत्तात्रेय ने हर एक चीज से सीखा। उन्होंने समस्त सृष्टि का अवलोकन किया और सबसे कुछ न कुछ ज्ञान अर्जित किया।

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु


भगवान दत्तात्रेय का 24 गुरुओं से शिक्षा ग्रहण करने का पौराणिक प्रसंग जीवन में गुरु की महत्ता को रोचक तरीके से उजागर करता है। क्योंकि ये 24 गुरुओं मात्र इंसान ही नहीं बल्कि पशु, पक्षी व कीट-पतंगे भी शामिल हैं। पृथ्वी- सहनशीलता व परोपकार की भावना। कबूतर – कबूतर का जोड़ा जाल में फंसे अपने…

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