मुलींच्या जन्माचे स्वागत उत्सवाने करा – देवी वैभवीश्रीजी

5 October 2017 वाशीम / प्रतिनिधी

आजही मुलामुलींमध्ये भेदभाव केल्या जातो. अनेक ठिकाणी मुलींच्या जन्मानंतर तीला कचराकुंडी, रेल्वेस्टेशन, बसस्थानक आदी परिसरात टाकण्याचे प्रकार उघडकीस येत आहेत. जर मुली जन्माला आल्या नाही तर आपल्याला बहिण, बायको, आई मिळणार नाही. मुलींच्या जन्माचे स्वागत उत्सवाने करा, असे आवाहन श्रीश्री रविशंकर यांच्या कृपापात्र शिष्या देवी वैभवीश्रीजी यांनी अमृतवाणीतून ४ ऑक्टोंबर रोजी श्री हनुमान रामकथेच्या तृतीय पुष्पात केले.
स्थानिक शुक्रवारपेठ येथील ज्ञानगंगा परिसरात बोलताना देवी वैभवश्रीजींनी पुढे सांगितले की, आज अनेक जण कन्येची जन्मापुर्वीच स्त्रीभ्रूणहत्या करतात. हा देशाला लागलेला कलंक आहे. मुलींना सुध्दा जन्माला येवू द्या. कारण भविष्यात ती लता मंगेशकर, सुनिता विल्यम, झाशीची राणी बनु शकते. मुलींनी सुध्दा श्रृंगार करतांना संस्कृतीचे भान ठेवावे. ज्यामुळे वासना उत्पन्न होईल असे वस्त्र परिधान करु नये. राष्ट्रमाता जिजाऊ यांनी केलेला श्रृंगार छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या नेतृत्वगुणातून प्रकाशित झाला आहे. ज्या दिवशी या देशामध्ये खर्‍या अर्थाने मुलींना समान दर्जा देवून तीचा सन्मान केल्या जाईल त्यादिवशी निश्‍चितच दुष्काळ नष्ट होईल. प्रकृती आनंद व्यक्त करुन भरपुर पाण्याचा वर्षाव करील असे त्यांनी सांगितले. भारतीय संस्कृती घेण्यापेक्षा देण्याला महत्व देते. जेव्हा आपण कुणाला मदत करतो तेव्हा तो प्रसाद बनतो. जिथे कथा होते ते र्तिर्थ बनते. चांगले कर्म आपल्याला आनंद मिळेल म्हणून करु नका तर आनंदाने चांगले कर्म करा. कथेमुळे जीवनाची व्यथा नष्ट झाली पाहीजे. सदगुरूची निवड करताना त्याची पूर्णपणे खात्री करून घ्या. धर्मग्रंथात साधु व संताचे लक्षण दिलेले आहे. भगवंताच्या कृपेने मिळालेले पद कुणीही घेवू शकत नाही. गुरुंच्या प्रती सर्मपणाची र्शध्दा ठेवा असे आवाहन त्यांनी केले.
कार्यक्रमाच्या यशस्वीतेकरीता डॉ. हरिष बाहेती, डॉ. सौ. सरोज बाहेती, जमनादास बाहेती, सनदी लेखापाल बालकिसन बाहेती, डॉ. जयकिसन बाहेती, प्रवीण बाहेती, राम बाहेती, गुड्ड बाहेती, व्दारकादास बाहेती, संदीप बाहेती यांनी पर्शिम घेतले.
गुरुवार ५ ऑक्टोंबर रोजी सकाळी ६ ते १२ वाजेपर्यंत जिर्णोध्दार व पुन:स्थापना, दुपारी १ ते ४ महाप्रसाद व सायंकाळी ७ वाजेपासून महारास सत्संग, ध्यानज्ञानचे आयोजन करण्यात आलेले आहे. सदर कार्यक्रमाचा भाविकभक्तांनी मोठया संख्येने लाभ घ्यावा असे आवाहन आयोजक बाहेती परिवाराने केले आहे.

Published in http://www.lokmat.com/vashim/celebrate-birth-girls/

 

Devi Vaibhavishriji Shrimad Bhagwat Katha Srimad Devi Bhagavatam Ram Katha Shiv Maha Puran Art of Living Programs
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मस्तक पर तिलक क्यों करना चाहिए?

अपने देश में है मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा प्रचलित है। यह प्राचीन है।

दरअसल, हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट में जिस स्थान पर टीका या तिलक लगाया जाता है यह भाग आज्ञाचक्र है । शरीर शास्त्र के अनुसार पीनियल ग्रन्थि का स्थान होने की वजह से, जब पीनियल ग्रन्थि को उद्दीप्त किया जाता हैं, तो मस्तष्क के अन्दर एक तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है । पीनियल ग्रन्थि के उद्दीपन से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होगा । इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन है | हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है विजयश्री प्राप्त करने के उद्देश्य रोली, हल्दी, चन्दन या फिर कुम्कुम का तिलक लगाया जाता है ।

  • स्त्रियां लाल कुंकुम का तिलक लगाती हैं। यह भी बिना प्रयोजन नहीं है। लाल रंग ऊर्जा एवं स्फूर्ति का प्रतीक होता है। तिलक स्त्रियों के सौंदर्य में अभिवृद्धि करता है। तिलक लगाना देवी की आराधना से भी जुड़ा है। देवी की पूजा करने के बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है। तिलक देवी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
  • इससे आज्ञाचक्र को नियमित उत्तेजना मिलती रहती है ।
  • तन्त्र शास्त्र के अनुसार माथे को इष्ट इष्ट देव का प्रतीक समझा जाता है | हमारे इष्ट देव की स्मृति हमें सदैव बनी रहे इस तरह की धारणा , ध्यान में रखकर, मन में उस केन्द्र बिन्दु की स्मृति हो सकें । शरीर व्यापी चेतना शनैः शनैः आज्ञाचक्र पर एकत्रित होती रहे । अतः इसे तिलक या टीके के माध्यम से आज्ञाचक्र पर एकत्रित कर, तीसरे नेत्र को जागृत करा सकें ताकि हम परा – मानसिक जगत में प्रवेश कर सकें ।
  • तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता हैं व देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता हैं। तिलक जिस भी पदार्थ का लगाया जाता हैं उस पदार्थ की ज़रूरत अगर शरीर को होती हैं तो वह भी पूर्ण हो जाती हैं। तिलक किसी खास प्रयोजन के लिए भी लगाये जाते हैं जैसे यदि मोक्षप्राप्ती करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शान्ति प्राप्ति हेतु अनामिका से लगाया जाता हैं।
  • आमतौर से तिलक अनामिका द्वारा लगाया जाता हैं और उसमे भी केवल चंदन ही लगाया जाता हैं तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी को आकर्षित करने का तथा ठंडक व सात्विकता प्रदान करने का निमित छुपा हुआ होता हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को तिलक ज़रूर लगाना चाहिए। देवताओ को तिलक मध्यमा उंगली से लगाया जाता है |
  • मनोविज्ञान की दृष्टि से भी तिलक लगाना उपयोगी माना गया है। माथा चेहरे का केंद्रीय भाग होता है | उसके मध्य में तिलक लगाकर, दृष्टि को बांधे रखने का प्रयत्न किया जाता है। तिलक हिंदू संस्कृति का पहचान है। तिलक केवल धार्मिक मान्यता नहीं है | तिलक लगाने से मन को शांति मिलती है| चन्दन को पत्थर पर घिस कर लगाते है | ऐनक के सामने हमारी मुखमंडल की आभा काफी सौम्य दिखता है| तिलक से मानसिक उतेज़ना पर काफी नियंत्रण पाया जा सकता है |
  • तंत्र शास्त्र में पंच गंध या अस्ट गंध से बने तिलक लगाने का बड़ा ही महत्व है तंत्र शास्त्र में शरीर के तेरह भागों पर तिलक करने की बात कही गई है, लेकिन समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है। इसलिए इस पर तिलक करने की परंपरा अधिक प्रचलित है |

श्री क्षेत्र नागरवाडी येथे संस्कारातून परिवर्तन शिबीर

7 ते 9 जुलै 2017 श्री क्षेत्र नागरवाडी येथे “संस्कारातून परिवर्तन” शिबीर #Deshonnati #Vaibhavishriji

7 ते 9 जुलै 2017 श्री क्षेत्र नागरवाडी येथे “संस्कारातून परिवर्तन” शिबीर  चांदूरबाजार जिल्हा अमरावती येथील श्री संत गाडगेबाबा यांचे अंतिम श्रद्धास्थान असलेले नागरवाडी येथील आश्रमशाळेत ३ दिवशीय संस्कार शिबीर संपन्न झाले. पुढे वाचा…

श्रीकृष्ण कथा में झूमे भक्त

श्रीकृष्ण कथा में झूमे भक्त

20 से 22 जून 2017, दैनिक भास्कर :  मालपुरा ग्रामीण (जयपुर, राजस्थान) में स्थित डिग्गी जाट धर्मशाला में आयोजित देवी वैभवीश्रीजी की वाणी में  3 दिवसीय श्रीकृष्ण कथामृत में झूमे भक्त : पूरा पढ़े…

http://epaper.patrika.com/c/19960322

http://epaper.patrika.com/c/20016605

मालपुरा में 1100 महिलाओं ने निकाली कलशयात्रा

20 से 22 जून 2017, दैनिक भास्कर :  मालपुरा ग्रामीण (जयपुर, राजस्थान) में स्थित डिग्गी जाट धर्मशाला में आयोजित देवी वैभवीश्रीजी की वाणी में  3 दिवसीय श्रीकृष्ण कथामृत का शुभारम्भ एतिहासिक विशाल कलशयात्रा निकालकर बड़े हर्षोल्लास के साथ हुआ |
 vaibhavishriji-at-diggi-bhaskar-2017
पूरा पढ़े:…

Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation (Hindi)

हम केवल शरीर या मन नहीं हो सकते क्योंकि अगर ऐसा होता तो शायद हममें और मशिन में कोई फर्क नहीं होता| इस बात को हम धर्म से न जोड़े और खुद चिंतन करें तो हमें यह अनुभव होता है कि कुछ तो है जो हमारे शरीर और मन को नियंत्रित है जो एक “शक्ति” या “चेतना” या “आत्मा” है|

Yoga – योग ! 5000 वर्ष पुराना ज्ञान एवं गूढ़ विज्ञान जिसे आज पूरी दुनिया ने माना है| हमारे देश की ऋषि परंपरा योग को आज विश्व भी अपना रहा है। यही वो विज्ञान या संस्कृति है जिसके कारण भारत को विश्वगुरु कहा जाता है| ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, योग हमारे लिये हर तरह से आवश्यक है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है। योग के माध्यम से आत्मिक संतुष्टि, शांति और ऊर्जावान चेतना की अनुभूति प्राप्त होती है, जिससे हमारा जीवन तनाव मुक्त तथा हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढता है।

आधुनिक युग में योग का महत्व बढ़ गया है। इसके बढ़ने का कारण व्यस्तता और मन की व्यग्रता है।
आधुनिक मनुष्य को आज योग की ज्यादा आवश्यकता है, जबकि मन और शरीर अत्यधिक तनाव, वायु प्रदूषण तथा भागमभाग के जीवन से रोगग्रस्त हो चला है। योग केवल रोगों को दूर करने की प्रक्रिया नहीं है| योग का आशय शरीर के समस्त रोगों को दूर कर, मस्तिष्क को तनाव मुक्त कर, मन को पवित्र बनाकर, आत्मा का ईश्वर से सम्बन्ध स्थापित करना है|

शरीर का मन पर और मन का शरीर पर प्रभाव पड़ता है| इसलिए योग ही एकमात्र ऐसी सम्पूर्ण पद्धति है जो मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बनाती है| जीवन की समस्याओं में हम उलझे रहते है जिसके कारण धीरे धीरे हमारा स्वंय पर नियन्त्रण नहीं रहता लेकिन योग एक ऐसा साधन जिससे हमारा मन और शरीर पर सम्पूर्ण नियंत्रण होने लगता है| और सबसे बड़ी बात यह है “योग” मनुष्य को आत्म संतुष्टि प्रदान करता है|

अनेक सकारात्मक ऊर्जा  के लिये योग का गीता में भी विशेष स्थान है। भगवद्गीता के अनुसार –
“सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते |”
अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। कर्म की कुशलता के लिए योग ही आज के जीवन का सहारा बन सकता है|

सामूहिक प्रयत्नातून दुष्काळावर मात शक्य

आताच एप्रिलमध्ये मराठवाड्यातील अंबेजोगाई तालुक्यातील पूस येथे श्रीमद् भागवत कथेसाठी जाण्याचा योग आला. मराठवाड्यातील पाण्याचा प्रश्न तसा युद्धजन्य आणि गंभीरच आहे. कुणीतरी म्हटलेलंच आहे कि “पुढचं युद्ध तेल आणि पाण्यासाठी होईल!” पण ते आता खरं होईल कि काय असं वाटायला लागलंय…!
 “तहान लागल्यावर विहीर खणायची” हे जरी मूर्खपणाचं लक्षण आहे, तेवढाच मूर्खपणा आपण एप्रिल महिना सुरु झाल्यावरच जे “पाणी वाचवा” ओरडतो, त्यात ही आहे. पाणी हे काय फक्त एप्रिल लागल्यावर जपून वापरण्यासाठी असतं का ? आज आपल्यापुढे पाण्याचे संकट आहे, दुष्काळाची स्थिती आहे, पण अजूनही येणारा महिना-दीड महिन्याचा काळ आपल्या हातात आहे.  “पाणी जपून वापरा” ही मोहीम आपण वर्षभर का राबवू शकत नाही ?

पाच-सातशे वर्षांपूर्वी, चंद्रगुप्त मौर्याने कुणाशी विवाह करून कुठचा मौर्य जन्माला घातला आणि महम्मद गजनी ने कुणासोबत काय काय केले या अभ्यासक्रमापेक्षा आता पाण्याचे व्यवस्थापन अर्थात (Water Management and Water Conservation) हा विषय शाळेच्या अभ्यासक्रमात समाविष्ट करायला हवा असं माझं वैयक्तिक मत आहे. आपण शेतकरी असाल किंवा शहरी, हा विषय शिकलाच पाहिजे अशी सक्ती असायला हवी. जाती-धर्माच्या, राजकीय पक्षांच्या नावाखाली एकमेकांची ‘जिरवण्या’पेक्षा आपण आजपासूनच पाणी कसं ‘जिरवायचं’ याकडे लक्ष दिले तर पाऊस आणि दुष्काळ आपली ‘जिरवणार’ नाही, हे लक्षात घ्या.

आज इजराइल सारख्या देशात आपल्या १० टक्के पाऊस पडतो तरीही तिथे नंदनवन फुलू शकतं. ह्याचं कारण म्हणजे त्यांचा Water Management हा अभ्यास इतका पक्का आहे, कि एकदा नळातून पडलेलं पाणी, हे जवळपास सात वेळा Recycle & Reuse होऊनच शेवटी जमिनीवर पडतं. हे आपण अमलात का आणू शकत नाही ?

पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी आपल्या ‘मन की बात’ या कार्यक्रमात यावेळी जलसंवर्धनाचा विषय मांडला. पावसाच्या पाण्याला वाहून न जाऊ देता ते जमिनीत मुरविण्यासाठी अनेक कल्पनाही त्यांनी त्यात मांडल्या आणि त्यानुसार प्रयत्न सुरु आहेत पण मग आपण अजून किती दिवस फक्त सरकारवर अवलंबून राहू शकतो ? “एकमेका सहाय्य करु अवघे धरु सुपंथ” या उक्तीनुरुप सर्वांच्या प्रयत्नातून या भीषण दुष्काळावर मात करण्यासाठी सामाजिक कार्य करणाऱ्या आर्ट ऑफ लिविंग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नाम फौंडेशन यांसारख्या अनेक संस्था, मंडळे आणि विविध कंपन्या आपापल्या परीने खारीचा वाटा उचलून पाणी अडवण्याकडे गंभीरतेने प्रयत्नशील आहेत. आपणही गणेशोत्सव, नवरात्री-उत्सवात ‘पाणी वर्षभर कसं वाचवता येईल’ ह्यावर देखावा करुन जागरूकता निर्माण करू शकतो. प्रत्येक धर्माच्या लोकांनी आपापल्या सणाला हे पाळायलाच हवं.

यंदा पाऊस चांगला पडणार ही बातमी आपल्यासाठी जितकी आनंद देणारी आहे, तितकीच आपल्या सगळ्यांसाठी एक संधी निर्माण करणारी आहे. एक आव्हान निर्माण करणारी आहे. गावागावांत पाणी वाचवण्यासाठी एखादी मोहीम आत्तापासूनच आपण हातात घेऊ शकतो का?  शेतकऱ्याना मातीची गरज असते. शेतात पिकांसाठी ती उपयोगी ठरते. मग गावातल्या तळ्यातला गाळ काढून तो आम्ही शेतात टाकला तर? शेतीसाठी फायदा होईलच त्याचबरोबर तळ्यात पाणी साठण्याची क्षमता वाढेल. सिमेंटच्या रिकाम्या गोण्यांमधून, खताच्या रिकाम्या पोत्यांमधून दगड आणि माती भरुन आपण ते पाणी वाहून जाण्याच्या मार्गावर टाकले तर? पाणी अडवता येईल का? पाणी पाच दिवस साठेल, सात दिवस साठेल, ते पाणी जमिनीत मुरेल. जमिनीतली पाण्याची पातळी वाढेल. पावसाचे पाणी, गावात पडणारे पाणी गावात राहील. साऱ्यांनी मिळून संकल्प केला आणि सुरुवात केली तर सामूहिक प्रयत्नांमधून हे शक्य आहे.