आज से लगभग 5 वर्षों पूर्व आनंदम चैनल पर आप की कथा हमने सुनी थी। किन्ही कारण से आपका नाम कथा में अंकित या प्रचारित नहीं होने के कारण हम लोग आपका शुभ नाम नहीं जान पाए थे और दुर्भाग्य से कुछ समय बाद आनंदम चैनल पर आपकी कथा का प्रसारण बंद हो गया। हमारी माता जी और हमने आप को दूसरे चैनलों पर खोजा परंतु आपका नाम मालूम नहीं होने के कारण असफलता मिली।शायद आपको यह जानकर आश्चर्य हो जब भी हम  आध्यात्मिक चैनल देखते है तब आपका स्मरण आता है।

 कुछ दिनों पहले आपको फेसबुक पर देख कर बड़ी खुशी मिली। और यह जानकर मन बहुत अधिक खुश हुआ कि आप आर्ट ऑफ लिविंग शिक्षक भी है। शायद आप सेे आत्मीयता का यह बहुत बड़ा कारण है।
कथावाचको से हमारे जीवन का बहुत गहरा रिश्ता है। युग तुलसीदास पद्म श्री राम किंकर जी की अनेकों पुस्तकें पढ़ने का सौभाग्य हमें मिला है। सभी कथावाचको की कथा से यह ज्ञान हुआ कि बिना गुरु के कल्याण नहीं है। तब गुरु की खोज में निकले और श्री श्री जी को हमने पाया जिसका श्रेय आप सभी कथावाचको को जाता है। आपकी फेसबुक प्रोफाइल जानने के बाद हमने सभी प्रवचन आपके सुने जिसमें जिससे यह संज्ञान में आया कि आप महान ग्रंथ योग वशिष्ठ पर भी प्रवचन करती हैं जो एक विशेष बात है।
मेरा मानना है कि आप की कथा का और अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए जिससे सनातन धर्म का यथार्थ ज्ञान समाज को हो सकें। मेरी इच्छा है कि एक बार हमारे शहर जौनपुर में आप की मंत्रमुग्ध कर देने वाली अमृत कथा आयोजित हो जिसमें प्रवचन के साथ ध्यान शिविर भी सम्मिलित हो। यह विशेष कार्य  आपके आशीर्वाद से संभव होगा। मेरा मानना है कथा के माध्यम से हम और अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं।
हमने बहुत लोगों की कथा सुनी है लेकिन जो आनंद आपकी कथा में आया है वह किसी के कथा में नहीं आया। कथा के साथ आपकी चेहरे की भव्यता और अत्यंत मधुर वाणी आपको देवी स्वरूप प्रदर्शित करती हैं। और कथा के मध्य में जब आप श्रोताओं से प्रश्न पूछती हैं “- सब सुन रहे हैं ना,सबका ध्यान है ना-” यह विधि मुझे बहुत अच्छी लगती है। और आपके चेहरे की मुस्कान से यह आभास होता है कि आप आत्मज्ञान के शिखर पर हैं और एक अपनेपन का एहसास आपसे होता है। आपकी हिंदी भाषा शैली भी अत्यंत स्पष्ट है जैसे शब्दों का चयन किसी हिंदी भाषा के  विद्वान द्वारा किया गया हो। आप द्वारा संस्कृत के श्लोक से अपने प्रवचन को प्रारंभ करना अति शोभिनी प्रतीत होता है। नारी रूप में मैंने बहुत कम आध्यात्मिक विद्वान देखे हैं जिसमें आप प्रमुख हैं।
यह भी अवगत हो कि आप की कथा का प्रभाव समाज पर बहुत अधिक पड़ता है परंतु हो सकता है की कथा सुनने वाले श्रोतागण आप के विषय में सकारात्मक अभिव्यक्ति किन्ही कारणों से नहीं कर पाते होंगे जैसा कभी मेरे साथ भी हुआ था,आज 5 वर्षों बाद हम अभिव्यक्त कर पा रहे हैं।और जितना हमने आप के विषय में महिमा कही है वह कम है।
आपसे एक निवेदन है की आनंदम चैनल पर प्रसारित होने वाली आपकी कथा का You tub लिंक भेज दीजिए। जिससे हमारी यादें ताजा हो सके। शायद आनंदम चैनल पर आप की वह कथा किसी कुंभ मेले की थी।
हम पूज्य गुरुदेव से प्रार्थना करेंगे कि आप कथा क्षेत्र में और प्रसिद्धि प्राप्त करें।
सादर
राजेंद्र प्रताप सिंह राजू
कनिष्ठ सहायक
शैक्षणिक विभाग
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय
जौनपुर
वॉलिंटियर,द आर्ट ऑफ लिविंग